आज़मगढ़

महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में रांगेय राघव पर हुआ साहित्यिक मंथन

आजमगढ़ में रांगेय राघव को समर्पित वृहद साहित्यिक समारोह

आजमगढ़ स्थित महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में रांगेय राघव शोधपीठ के तत्वावधान में एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित कुलपति सभागार में संपन्न हुआ, जिसमें शिक्षाविदों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

कुलपतियों ने किया दीप प्रज्वलन, साहित्य पर रखा विचार

समारोह की विधिवत शुरुआत ज्ञान की देवी मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलन से हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, मिर्जापुर की कुलपति प्रो. शोभा गौड़ उपस्थित रहीं।

रांगेय राघव का साहित्य: समाज का सजीव दर्पण

अपने संबोधन में प्रो. शोभा गौड़ ने कहा कि रांगेय राघव का साहित्य तत्कालीन समाज का यथार्थ प्रतिबिंब है। उन्होंने बताया कि अल्पायु में ही रांगेय राघव ने कविता, उपन्यास, कहानी और रिपोर्ताज जैसे विविध साहित्यिक क्षेत्रों में अमूल्य योगदान दिया। उनका लेखन जनसामान्य के संघर्ष, सामाजिक विषमताओं और मानवीय संवेदनाओं को न केवल दर्शाता है, बल्कि समाधान की दिशा भी प्रस्तुत करता है।

संपूर्ण साहित्यकार थे रांगेय राघव: कुलपति

कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि रांगेय राघव की साहित्यिक प्रतिभा किसी एक विधा तक सीमित नहीं थी। ब्रजभाषा सहित स्थानीय भाषाओं पर उनकी पकड़ उन्हें विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें दीर्घायु मिलती, तो हिंदी साहित्य को और भी समृद्धि मिलती।

शिक्षाविदों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में प्रो. सुजीत कुमार श्रीवास्तव और डॉ. विजय प्रकाश उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संचालन डॉ. त्रिशिका श्रीवास्तव ने किया। बड़ी संख्या में उपस्थित शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्रों ने आयोजन को प्रेरणादायक बताया।

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